Sunday, September 18, 2011

दुनिया का सबसे महंगा पेट्रोल भारत में!

नई दिल्ली ।। अगर भारत में पेट्रोल कीमते आपकी जेब जला रही हैं तो यूं ही नहीं। सच यह है कि दुनिया के दूसरे तमाम देशों के नागरिकों के मुकाबले हिंदुस्तानियों को सबसे ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं पेट्रोल पर। मौजूदा एक्सचेंज रेट पर आधारित तमाम देशों में रिटेल पेट्रोल कीमतों के आंकड़े बताते हैं कि भारत सबसे महंगे पेट्रोल वाले देशों में है। अगर विभिन्न देशों के परचेजिंग पावर के अंतर को ध्यान में रखते हुए (यानी पीपीपी मेथड से) विचार करें तो भारत में पेट्रोल की दर सबसे महंगी है (सुदूर के एकाध छोटे-छोटे देश ही इसका अपवाद हैं)। इस मेथड से भारत में पेट्रोल कीमतें अमेरिका से 5 गुना तो रूस और जापान से तीन गुना ज्यादा बैठती हैं।

पेट्रोल कीमतों का भारतीय मुद्रा में बदलते हुए एक सामान्य तुलना भी की जाए तो भारती में पेट्रोल की दर 98 देशों से महंगी बैठती है। इस सामान्य तुलना में ओपेक (तेल निर्यातक देशों का संगठन) के देशों में तो तेल सस्ता है ही (जैसे वेनेजुएला में 1.14 रु प्रति लीटर और ईरान में 4.8 रु प्रति लीटर) अमेरिका और इंडोनेशिया (जहां पेट्रोल पर टैक्स कम है) जैसे देशों में भी पेट्रोल काफी सस्ता है। उदाहरण के लिए अमेरिका में यह 42.82 रुपए प्रति लीटर पड़ता है। मगर. इस लिहाज से यूरोपीय समुदाय के देश भारत से आगे हैं जहां पेट्रोल काफी महंगा दिखता है।

फिर भी, इस तुलना को सही नहीं कहा जा सकता। वजह यह है कि परचेजिंग पावर के लिहाज से भारत इन देशों के मुकाबले कहीं नहीं ठहरता। अगर परचेजिंग पावर के इस फर्क को ध्यान में रखते हुए (यानी पीपीपी मेथड से) तुलना की जाए तो काफी हद तक सही स्थिति सामने आ जाती है। और यह सही स्थिति चौंकाने वाली है।

इस मेथड से भारत में पेट्रोल की रिटेल कीमत (डॉलर में) 3.95 डॉलर प्रति लीटर बैठती है, जबकि चीन में 1.95 डॉलर, ब्रिटेन में 1.85 डॉलर, ब्राजील 1.7 डॉलर, जापान में 1.28 डॉलर, रूस में 1.26 डॉलर, अमेरिका में 0.76 डॉलर, सऊदी अरब में 0.23 डॉलर और वेनेजुएला में 0.03 डॉलर बैठती है। साफ है कि भारत में पेट्रोल अमेरिका के मुकाबले पांच गुना, चीन और ब्रिटेन के मुकाबले दोगुना तथा जापान और रूस के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा है।
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10028926.cms

2 comments:

  1. ज्यादा दिक्कत नहीं है। बढ़ाने और इस्तेमाल करने वाले कम ही हैं।

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  2. हमारे यहाँ गरीब को और गरीब करने वाली मनुस्मृति आज भी काम कर रही है, यह वास्तविकता है.

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