Tuesday, January 10, 2012

" जातिवाद क्या है ?? " ::-- पेरियार इ.वी. रामासामी

THUS SPOKE, PERIYAR E.V.R. ::-->>
" जातिवाद क्या है ?? " ::-- पेरियार इ.वी. रामासामी
(कोइन्म्ब्तूर में सन 1958 को पेरियार दुयारा दिया गये भाषण के कुछ अंश )
" मैं क्या हूँ ?? ( What I am ??)
" पहला ::-- मुझे ईशवर तथा दुसरे देवी-देवताओं में कोई आस्था नहीं है / "
"दूसरा ::-- दुनियां के सभी संगठित धर्मो से मुझे सख्त नफरत है /"
"तीसरा ::-- शास्त्र, पुराण और उनमे दर्ज देवी-देव्त्ताओं में मेरी कोई आस्था नहीं है , क्योंकि बह सारे के सारे दोषी हैं और उनको जलाने तथा नष्ट करने के लिए मैं "जनता" से अप्पील करता हूँ /"

मैंने सब कुछ किया और मैंने गणेश आदि सभी ब्रह्मणि देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डाली हैं और राम आदि के चित्र भी जला दिए हैं / मेरे इन कार्यों के बावजूद भी, मेरी सभायों में मेरे भाषण सुनने के लिए यदि हजारों की गिनती में लोग इकट्ठे होते हैं, तो यह बात सपष्ट है कि, " स्वाभिमान तथा बुद्धि का अनुभव होना जनता में , जागृति का सन्देश है /"
'द्रविड़ कड़गम आन्दोलन' का क्या मतलब है ?? इसका केवल एक ही निशाना है कि, इस नक्क्मी आर्य ब्राह्मणवादी और वर्ण व्यवस्था का अंत कर देना, जिस के कारन समाज उंच और नीच जातियों में बांटा गया है / इस तरह 'द्रविड़ कड़गम आन्दोलन' , " उन सभी शास्त्रों, पुराणों और देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखता, जो वर्ण तथा जाति व्यवस्था को जैसे का तैसा बनाये रखे हुए हैं /"

राजनितिक आज़ादी प्राप्ति के बाद सन 1958 ( लगभग 10 बर्षों के बाद भी ) तक्क भी वर्ण व्यवस्था और जातिगत भेद-भाव की निति ने जनता के जीवन के ऊपर अपना वर्चस्व बनाये रखने के कारन, देश में पिछड़ेपण को साबित कर दिया है / अर्थात , आर्य ब्रह्मण सरकार ने, इन 10 बर्षों तक्क भी वर्ण और जाति व्यवस्था को ख़त्म करने का कोई भी यत्न नहीं किया है / किसी और मुल्क में इस तरह के जाति के भेदभाव के कारण बहाँ की जनता हजारों की संख्या में बांटी हुयी नहीं है / हैरानी की बात यह है कि, समझदार लोग भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं / अपनी ही लालसावादी स्वारथ का दौर इस देश के नेताओं में है / कुछ लोग राष्ट्रीयता तथा राजनितिक पार्टी के आधार पर ( कांग्रेस की और इशारा करते हुए ) अपने आपको समाज-सेवी कहलाते हैं, वे भारत की असली समस्याओं के तरफ थोडा सा भी ध्यान नहीं देते / जिस करके देशवासी पछडे हालातों में से गुजर रहे हैं / राजनितिक आज़ादी प्राप्त करने से बाद दुसरे देशों के लोगों ने , राष्ट्रीय विकास और सामाजिक सुधारों में बड़े पैमाने पर तरक्की की है // .......................................... /////

आज से 2000 वर्ष पूर्व, तथागत बुद्ध ने हिन्दू धर्म के जहरीले अंगों से छुटकारा पाने के लिए जनता के दिलो-दिमाग को आज़ाद करने का यत्न किया था / बुद्ध ने जनता को , क्यों, कैसे तथा कौन से प्रशन किये और बस्तु / चीज के यथार्थ गुण तथा सवभाव के समीक्षा की / उन्होंने ने ब्राह्मणों के, वेदों को फिजूल बताया , उन्होंने किसी भी बस्तु से किसी भी ऋषि और महात्मा का अधिकार सवीकार नहीं किया / उन्होंने लोगों को अपनी भाषा में आत्म-चिंतन करने का और जीवन के साधारण सच्च को समझने का उपदेश दिया / इसका नतीजा क्या निकला ? ऐसे उपदेशकों को मौत के घाट उतारा गिया / उनके घर-बार जला दिए गए / उनकी औरतों का अपमान किया गया / बुद्ध धर्म के भारत में से अलोप हो जाने के बाद तर्कवाद समापित हो गया / बुद्ध की जन्म-भूमि से बुद्ध का प्रचार - प्रसार ना हो सका / बह चीन और जापान में चला गया / यहाँ उसने इन देशों को दुनियां के महान देशों की लाइन में खड़ा कर दिया / राष्रीय चरित्र, अनुशासन, शुद्धता, ईमानदारी और महिमानवाजी में कौनसा मुल्क जापान की बराबरी कर सकता है ?? ..............................................................................................///

इश्वर कैसे तथा क्यों जन्म-मरन करता है ? सभी देवी-देवताओं को देखो, राम का जन्म 'नौवीं तिथि ' को हुआ, सुभ्रामानिया का जन्म 'छेवीं तिथि' को हुआ, कृष्ण का जन्म 'अष्टमी तिथि' को हुआ, और पुराणों के अनुसार इन सभी देवताओं की म्रत्यु भी हुई / क्या इस कथन के बाद भी हम उनकी पूजा देवते समझ कर करते रहें ?? ईशवर की पूजा क्यों करनी चाहिए ? ईशवर को भोग लगाने का क्या मतलव है ? रोजाना उसको नए कपडे पहना कर हार-शिंगार किया जाता है, क्यों ? यहाँ तक कि, मनुष्यों दुयारा ही, देवियों को नंगा करके स्नान करवाया जाता है ? इस अशलीलताके कारण ना तो उन देवियों को और ना ही उनके भक्तों को कभी क्रोध आता है, क्यों ? देवताओं को स्त्रियों कि क्या जरूरत है ? अक्सर वे एक औरत से सन्तुष नहीं होते / कभी कभी तो उनको एक एक रखैल यां वैश्य की जरूरत होती है / तिरुपति के देवता, मुस्लिम वैश्य के कोठे पर जाने की इच्छा करते हैं , और क्यों प्रतेक बर्ष यह देवता विवाह करवाते हैं ?? पिछले बर्ष के विवाह का क्या नतीजा है ? उसका कब तलाक हुआ ? किस अदालत ने उनके इस छोड़ने - छुड़ाने की मंजूरी दी है ? क्या इन सभी देवी-देवताओं के खिलवाड़ ने हमारी जनता को ज्यादा अकल्मन्द (समझदार), ज्यादा पवित्र और बड़ी सत्र पर एकता में नहीं बाँधा है ?
ईसाई, मुस्लिम और बुद्ध धर्म के संस्थापक दया भावना, करुणा, सज्जनता और भला करने वाले अवतार माने जाते हैं / ईसाई और बुद्ध धर्म के मूर्ति पूजा इन गुणों को दर्शाती है /

ब्राह्मण देवी-देवताओं को देखो, एक देवता तो हाथ में 'भाला' / त्रिशूल उठाकर खड़ा है , और दूसरा धनुष वाण , अन्य दुसरे देवी-देवते कोई गुर्ज , खंजर और ढाल के साथ सुशोभित हैं, यह सब क्यों है ? एक देवता तो हमेशा अपनी ऊँगली के ऊपर चारों तरफ चक्कर चलाता रहता है, यह किस को मारने के लिए है ?

यदि प्रेम तथा अनुग्रह आदमी के दिलो-दिमाग के ऊपर विजय प्राप्त कर लें तो, इन हिंसक अस्त्र -शास्त्र की क्या जरूरत है ? दुनियां के दुसरे धर्म उपदेशकों के पास कभी भी कोई हथियार नहीं मिलेगा / क्योंकि वो , शान्ति, अमन समानता तथा न्याय के पोषक हैं / जबकि आर्य-ब्राहमण धर्म सीधे तौर पर असमानता, अ-न्याय तथा हिंसा आदि का प्रवर्तक है / यही कारण है कि शान्ति, अमन तथा न्याय की बात करने वाले लोगों को डराने के लिए, आर्यों ब्राह्मणों ने अपने देवताओं के हाथों में हिंसक हथियार दिए हुए हैं / सपष्ट तौर पर हमारे ये देवी- देवता, बुराई करने वालों पर विजय प्राप्त करने के लिए इनको हिंसक शास्त्रों का इस्तेमाल करते हैं / क्या इसमें कोई कामयावी मिली है ?

हम आज कल के समय में रह रहे हैं / क्या यह वर्तमान समय इन देवी-देवताओं के लिए सही नहीं है ? क्या वे अपने आप को आधुनिक हथियारों से लैस करने और धनुषवान के स्थान पर , मशीन, यां बन्दूक धारण क्यों नहीं करते ? रथ को छोड़कर क्या श्री कृष्ण टैंक के ऊपर सवार नहीं हो सकते ? मैं पूछता हूँ कि, जनता इस परमाणु युग में इन देवी-देवताओं के ऊपर विश्वास करते हुए क्यों नहीं शर्माती ?? ..................... Periyar E.V. Ramasami ................. साभार ::-- विनोद कुमार बर्मन, मूलनिवासी संग्राम

19 comments:

  1. लगता है कि यह पेरियार हिन्दुओं से बुरी तरह बेइज्जत हुआ होगा, इसने कुछ गलत जरुर किया होगा, बाद में ये ईसाईयों/बुद्ध का चमचा बना होगा जो किसी काम के धर्म नहीं है। तभी तो इसने इनका महिमा वन्दन किया है, लगता है कि इसाई व बुद्ध धर्म वाले मुल्लों से डरते है तभी तो इनकी बोलती उनके खिलाफ़ बन्द हो जाती है। अभी के लिये इतना ही....... वैसे मजा आ गया हिन्दुओं के बारे में इस इन्सान के विचार देखकर, ये हिन्दु है ही इस लायक, लेकिन फ़िर भी हिन्दु अभी तक सबसे महान है क्यों? ऐसा क्या कारण है कि लाखों सालों से चल रहा हिन्दू धर्म, जबकि मात्र एक/दो हजार साल से ही बने धर्म ईसाई/बुद्ध/मुल्ले लाख कोशिश के बाद भी हिन्दू धर्म को नहीं मिटा सके। हिन्दू धर्म से जातिवाद व मूर्तिपूजा मिट जाये तो यह सबसे महान धर्म और भी महान हो जायेगा, लेकिन नहीं लगता है कोई माई का लाल ऐसा कर पायेगा।

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    1. हिन्दू धर्म से जातिवाद समाप्त अगर हो गया तो फिर बचेगा ही क्या ... हिन्दू धर्म को जातिवाद ने ही पाल रखा है...

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  2. sandip pawar ji to ye jativad &murtipuja mitayega kaun ? brahman to mitayega nahi yadi jativad mitgaya to uncha kaun rah jayegaaur kaun nicha.&murtipooga kyo mitayege yadi ve murtipooja band kr denge to bin kam kiye bina koi hani paye arbo karoro rupare kaun kamayega.?

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  4. प्रत्येक श्रेष्ठ और सुसभ्य मनुष्य आर्य है |
    अपने आचरण, वाणी और कर्म में वैदिक सिद्धांतों का पालन करने वाले, शिष्ट, स्नेही, कभी पाप कार्य न करनेवाले, सत्य की उन्नति और प्रचार करनेवाले, आतंरिक और बाह्य शुचिता इत्यादि गुणों को सदैव धारण करनेवाले आर्य कहलाते हैं |
    ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र यह चार वर्ण वास्तव में व्यक्ति को नहीं बल्कि गुणों को प्रदर्शित करते हैं. प्रत्येक मनुष्य में ये चारों गुण (बुद्धि, बल, प्रबंधन, और श्रम) सदा रहते हैं. आसानी के लिए जैसे आज पढ़ाने वाले को अध्यापक, रक्षा करने वाले को सैनिक, व्यवसाय करने वाले को व्यवसायी आदि कहते हैं वैसे ही पहले उन्हें क्रमशः ब्रह्मण, क्षत्रिय या वैश्य कहा गया और इनसे अलग अन्य काम करने वालों को शूद्र. अतः यह वर्ण व्यवस्था जन्म- आधारित नहीं है|
    आजकल प्रचलित कुलनाम ( surname) लगाने के रिवाज से इन वर्णों का कोई लेना-देना नहीं है | हमारे प्राचीन धर्मग्रन्थ रामायण, महाभारत या अन्य ग्रंथों में भी इस तरह से प्रथम नाम- मध्य नाम- कुलनाम लगाने का कोई चलन नहीं पाया जाता है और न ही आर्य शब्द किसी प्रकार की वंशावली को दर्शाता है|
    निस्संदेह, परिवार तथा उसकी पृष्टभूमि का किसी व्यक्ति को संस्कारवान बनाने में महत्वपूर्ण स्थान है परंतु इससे कोई अज्ञात कुल का मनुष्य आर्य नहीं हो सकता यह तात्पर्य नहीं है | हमारे पतन का एक प्रमुख कारण है मिथ्या जन्मना जाति व्यवस्था जिसे हम आज मूर्खता पूर्वक अपनाये बैठे हैं और जिसके चलते हमने अपने समाज के एक बड़े हिस्से को अपने से अलग कर रखा है – उन्हें शूद्र या अछूत का दर्जा देकर – महज इसलिए कि हमें उनका मूल पता नहीं है | यह अत्यंत खेदजनक है |
    आर्य शब्द किसी गोत्र से भी सरोकार नहीं रखता | गोत्र का वर्गीकरण नजदीकी संबंधों में विवाह से बचने के लिए किया गया था | प्रचलित कुलनामों का शायद ही किसी गोत्र से सम्बन्ध भी हो |
    आर्य शब्द श्रेष्टता का द्योतक है | और किसी की श्रेष्ठता को जांचने में पारिवारिक पृष्ठभूमि कोई मापदंड हो ही नहीं सकता क्योंकि किसी चिकित्सक का बेटा केवल इसी लिए चिकित्सक नहीं कहलाया जा सकता क्योंकि उसका पिता चिकित्सक है, वहीँ दूसरी ओर कोई अनाथ बच्चा भी यदि पढ़ जाए तो चिकित्सक हो सकता है. ठीक इसी तरह किसी का यह कहना कि शूद्र ब्राह्मण नहीं बन सकता – सर्वथा गलत है |
    ब्राह्मण का अर्थ है ज्ञान संपन्न व्यक्ति और जो शिक्षा या प्रशिक्षण के अभाव में ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य बनाने की योग्यता न रखता हो – वह शूद्र है | परंतु शूद्र भी अपने प्रयत्न से ज्ञान और प्रशिक्षण प्राप्त करके वर्ण बदल सकता है | ब्राह्मण वर्ण को भी प्राप्त कर सकता है |
    द्विज – अर्थात् जिसने दो बार जन्म लिया हो | जन्म से तो सभी शूद्र समझे गए हैं | ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य इन तीन वर्णों को द्विज कहते हैं क्योंकि विद्या प्राप्ति के उपरांत योग्यता हासिल करके वे समाज के कल्याण में सहयोग प्रदान करते हैं | इस तरह से इनका दूसरा जन्म ‘ विद्या जन्म’ होता है | केवल माता-पिता से जन्म प्राप्त करनेवाले और विद्याप्राप्ति में असफ़ल व्यक्ति इस दूसरे जन्म ‘ विद्या जन्म ‘ से वंचित रह जाते हैं – वे शूद्र हैं |
    अतः यदि ब्राह्मण पुत्र भी अशिक्षित है तो वह शूद्र है और शूद्र भी अपने निश्चय से ज्ञान, विद्या और संस्कार प्राप्त करके ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य बन सकता है | इस में माता- पिता द्वारा प्राप्त जन्म का कोई संबंध नहीं है |

    आइए, हम सब सत्य ग्राही बनें, मिथ्या जातिवाद की जकड़ से मुक्त होकर एकात्म और सशक्त समाज तथा राष्ट्र का निर्माण करें | विशेष विश्लेषण के लिए पढ़ें: http://agniveer.com/4034/caste-vedas-hi/

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    1. सही कहाँ ललित जी आपने ....................................................और संदीप पवार की बातें तो मुझे मूर्खतापूर्ण लगती हैं जो बोद्ध धर्म को दोष दे रहा हैं अगर वो खुद दलित होता तो पता चलता.....

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    2. संदीप पवार की बातें तो मुझे मूर्खतापूर्ण लगती हैं SAHI KAHA, MURKHO KO MERI BATE AISI HI LAGTI HAI, HA HA HA HA, LAGTA HAI MURTI POOJAK HITESHI APNA NAAM BHI UJAGAR NAHI KARTA,

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    3. क्यों भाई देवता से इंसान बन गया क्या ......इसलिए अपने नाम से "जाटदेवता" हटा दिया ........................ऐसा कर "जातदेवता" लगा ले क्यों की हिन्दू धर्म और जातपात तुझे बहुत अच्छी लगती है न ...

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    4. haa haa, Apun to janam se hi "Jatdevta" hai. tumhe mirchi lagi to mujhe kya?

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  5. मिस्टर जात देवता लगता हैं जनम से इंसान नहीं हो...बस जातपात को बढ़ावा देने वाली एक कठपुतली हो ......अगर कोई भारतीय किसी उच्च जाति मे जन्म लेता है तो कहता हैं i am proud to be indian ..........india is great.....but अगर कोई भारतीय किसी नीची जाति मे जन्म लेता हैं और जब उसके साथ जाति के नाम पर भेदभाव होता है तो कहता है i am ashamed to be born in this scheduled caste just bcoz of atrocities and caste discrimination done high cast community and he feels ashamed to be born indian .......

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    2. हिन्दू धर्म से जातिवाद व मूर्तिपूजा मिट जाये तो यह सबसे महान धर्म और भी महान हो जायेगा, लेकिन नहीं लगता है कोई माई का लाल ऐसा कर पायेगा।}..................\भाई जातदेवता कोई माई का लाल ऐसा कर भी लेगा तो तुम लोग कोनसा सुधरोगे ............
      CHAL, YE BATA MANINE JATIWAD KI BAAT & BURAI KAB AUR KISKI KI?
      तुम्हारी हर बात मे से जातिवाद और धर्मवाद टपकता हैं every time u keep saying my hindu religion is great and bla.bla.bla bla bla.................हर कोई ब्राहमणौ की बुराई करता है की जातिवाद को बढ़ावा दिया हैं तो तुम लोग कोनसे शरीफ हो

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  6. HA HA HA HA
    pandto ke rehte koi hundu dharam se murti pooja nahi hatwa sakta,
    .हर कोई ब्राहमणौ की बुराई करता है की जातिवाद को बढ़ावा दिया हैं isme jhoot kya hai? arre arre tumhara dard ab pata laga, tumhe mirshi kyo lagi? kahi tum bhahman to nahi. khair tum jo bhi ho usse mujhe kya? tumhari fitrat to apna asli naam & pehchhan chipane ki hai, drama karne ki

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    1. kahi tum bhahman to nahi. khair tum jo bhi ho usse mujhe kya?..........................दिखा दी न औकात पूछ बैठे न जात .........................और लगता हैं तुम्हें हिन्दी समझ नहीं आती so my name is manish ...............................got it...

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    2. ARE-ARE ITNI JALDI AUKAT KI BAAT KARNE LAGE, FARJI ID KI JAGH ASLI ID SE COMMENT KARO, TAKI HAME BHI TUMHARI AUKAT PATA LAGE? HAI KI NAHI? AGAR AB TUMNE FARJI ID SE COMMENT KIYA TO MAIN KOI REPLY NAHI KARUNGA? APNI ASLIYAT KYU HIDE KAR RAHE HO? (THIS IS MY LAST COMMENT ON UNKOWN ID)

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    3. mr panwar ...............meri koi id nahi hai mene to apka comment padha or uska jawab diya ..................now i also dont want to continue this arguement further...........................or ha sandip ji मैंने आपसे जो भी बातें की उनका बुरा मत मानना अगर मेरी तरफ कोई गलती हुई है तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ ........सबका अपना अपना point of view होता हैं मैंने अपना view आपके सामने रखा ...ये सब बात मैंने इसलिए की क्योंकि मैं खुद एक अछूत या दलित जाति से हूँ मैं एक पढे लिखे सम्पन्न परिवार से हूँ फिर भी मुझे जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ता हैं इसलिए मैंने आपसे कहा था की अगर आप खुद दलित होते तो पता चलता ...........................

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  7. the hindu word is not cast they say wrong only mans & trees etc spasis are cast betwin are difrent

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  8. Mai ambedkar periyar ....dono Ki baato se 100% agree hoon ...lekin murtipooja eik vyaktigat mamla Hai ..!!! Jaati pati ukhad deni Chahiye ...chahe Hindu ..DHARM ...Pura Ka Pura ...bouddh DHARM mai hi kyon na convert ho jaaye ...!!! Brahmin nahi chahte Ki jaati paati khatam ho ...!!!

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  9. हर एक आदमी की चारों जातियां होती हैं हर एक आदमी में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र ये चारों खूबियाँ होती हैं. और समझने की आसानी के लिए हम एक आदमी को उसके ख़ास पेशे से जोड़कर देख सकते हैं. हालाँकि जातिप्रथा आज के दौर और सामाजिक ढांचे में अपनी प्रासंगिकता पहले से ज्यादा खो चुकी है. यजुर्वेद [32.16 ] में भगवान् से आदमी ने प्रार्थना की है की “हे ईश्वर, आप मेरी ब्राहमण और क्षत्रिय योग्यताएं बहुत ही अच्छी कर दो”. इससे यह साबित होता है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र आदि शब्द असल में गुणों को प्रकट करते हैं न कि किसी आदमी को. तो इससे यह सिद्ध हुआ कि किसी व्यक्ति को शूद्र बता कर उससे घटिया व्यवहार करना वेद विरुद्ध है. अगर किसी भी जातिवादी दिमाग वाले आदमी से पूछा जाए कि वो पिछले 1000 सालों में किसी भी जातिवादी दिमाग का कोई महत्वपूर्ण योगदान गिनवा दे, तो या तो वो आदमी बगलें झाँकने लगेगा या फिर उसकी आँखों के सामने अन्धकार छा जाएगा और फिर आखिर में उसे कोई जवाब ही नहीं सूझेगा

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