Friday, October 19, 2012

मुझे रावण जैसा भाई चाहिए

गर्भवती माँ ने बेटी से पूछा
क्या चाहिए तुझे? बहन या भाई
बेटी बोली भाई
किसके जैसा? बाप ने लडियाया
रावण सा, बेटी ने जवाब दिया
क्या बकती है? पिता ने धमकाया
माँ ने घूरा, गाली देती है
बेटी बोली, क्यूँ माँ?

बहन के अपमान पर राज्य
वंश और प्राण लुटा देने वाला
शत्रु स्त्री को हरने के बाद भी
स्पर्श न करने वाला
रावण जैसा भाई ही तो
हर लड़की को चाहिए आज
छाया जैसी साथ निबाहने वाली
गर्भवती निर्दोष पत्नी को त्यागने वाले
मर्यादा पुरषोत्तम सा भाई
लेकर क्या करुँगी मैं?
और माँ
अग्नि परीक्षा चौदह बरस वनवास और
अपहरण से लांछित बहु की क़तर आहें
तुम कब तक सुनोगी और
कब तक राम को ही जन्मोगी
माँ सिसक रही थी - पिता आवाक था.
साभार - 'भूमिजा'

8 comments:

  1. उत्कृष्ट प्रस्तुति रविवार के चर्चा मंच पर ।।

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  2. हमारे धार्मिक ग्रंथों का एक चेहरा ये भी है पर धर्म में अंधे होकर विवेकहीन इंसान इस पहलु पर गौर ही नहीं करते ना करने देते शाबाशी देती हूँ इस पहलू पर चली तुम्हारी कलम बधाई स्वीकारें

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  3. आपका स्वागत है राजेश कुमारी जी

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  4. This has been circulating in the internet. Could you tell me who wrote this??

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  5. यह भारतीय नारी के दिल से निकली आवाज़ है.

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  6. Wonderful!! Brilliant poetry...
    "साभार - 'भूमिजा'"
    It makes me wonder if it is taken from Nagarjun's Bhoomija?

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  7. मेरी इस कविता को प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद। 1998 में लिखी यह कविता अभी भी दुर्भाग्य से उतनी ही समसामयिक है।
    सुधा शुक्ला
    http://hamkahlina.blogspot.in

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  8. कहा जाता है कि रावण जैसा महान भाई सब को मिले जो अपनी बहन शूर्पनखा के सम्मान के लिए सब कुछ कुर्बान कर गया......तो मित्रो, आपको बता दूं यही रावण ने शूर्पनखा को विधवा किया था.....शक्ति के मद में चूर रावण युद्ध में अपने जीजा को पहचान न सका और गर्दन काट दी उसकी (उत्तर कांड/ सर्ग 23-24)
    अगली बात, रावण महाराज एक बलात्कारी व्यक्ति है ....वो बलात्कार करता है बहुत सी स्त्रियों का .....उसके फलस्वरूप उन्हें एक श्राप मिला होता है कि उसकी मृत्यु का कारण कोई स्त्री ही बनेगी ....और वो रम्भा का भी बलात्कार करता है जिसके फलस्वरूप उसे श्राप मिला होता है कि वो किसी भी स्त्री यदि भविष्य में बलात्कार करेगा तो उसके सर के सात टुकड़े हो जायेंगे, इसी लिए वो सीता के साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं करता, मनाने की कोशिश करता रहता है.(उत्तर कांड/सर्ग 27)
    रावण को पता लग चुका था.....मारीच के ज़रिये...हनुमान के ज़रिये भी ....कि राम कोई साधारण योधा नहीं.....फिर हनुमान भी कत्लेआम मचा चुके थे लंका में

    हनुमान कोई दूत की तरह लंका में प्रवेश नहीं हुए थे, दूत होते तो सीधा रावण से मिलते, नहीं, वो पहले जासूस की तरह सीता से मिलते हैं, रावण की अशोक वाटिका उजाड़ते हैं, उसके योधयों को मारते हैं, फिर रावण दरबार में पहुंचाए जाते हैं....इस तरह के उत्पाती जासूस को रावण विभीषण के कहने पे मृत्युदंड देने का विचार त्याग देता है
    रावण को राम की शक्ति के बारे में खर और दूषण के वध से ही पता लग चूका था, उसके बावजूद, वो एक एक करके अपने योधा भेजता है राम से लड़ने और वो एक कर के सब मरते रहते हैं
    और क्या महानता है रावण की, अपने अपमान का बदला लेने के लिए लंका की लाखों स्त्रियों, बच्चों को जिंदा जलाया गया उस युद्ध में.....नर मारे गए....जलाये गए......लंका बर्बाद हो गयी.......किसलिए?

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