Saturday, June 9, 2012

ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या पर प्रतिक्रियाओं का समग्र पाठ

By Ravish Kumar (NDTV) 


आज सुबह ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के बाद फेसबुक पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। सोचा कि ज्यादातर को एक जगह किया जाए और उन्हें फिर से देखा जाए। नायक खलनायक के बीच बहुत सी बातें हुई होंगी जो आज की पीढ़ी को शायद ही पता चलें। इन्हें देखकर आप और जानने को उत्सुक होंगे। एक व्यक्ति की हत्या से कितनी अलग अलग तरह की आवाज़ें आने लगीं हैं।
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Ranjan Rituraj-
ब्रह्मेश्वर मुखिया नहीं रहे ! शहीद हो गए ! आरोप थे उनपर 'नरसंहार' का ! मामला कोर्ट में था ! पर् मुझे नहीं लगता रणवीर सेना राष्ट्र विरोधी थी - यह मेरी व्यक्तिगत राय है ! 
पर् जिस तरह की प्रतिक्रया फेसबुक पर् दी जा रही है - वो गलत है ! वरिष्ठ पत्रकार जातिगत रंग देकर लोगों की घृणित प्रतिक्रिया का लुफ्त उठा रहे हैं - मै इसकी निन्दा करता हूँ ! मिथिला में बैठा आदमी 'शाहाबाद' की जमीनी हकीकत नहीं समझ सकता... है ! 
मै उस क्षेत्र से नहीं हूँ जहाँ नक्सलवाद है - पर् पटना में पढ़ने के दौरान मेरे कई साथीओं को गंगा पार ले जाकर निर्मम हत्या कर दी गयी थी क्योंकी वो जहानाबाद के थे - कुछ समझ में नहीं आया - बस बुत की तरह दोस्तों की लाश देखता रह गया था - सबके चेहर मुझे आज भी याद है ! 'बारा' के ५२ लोगों की हत्या एक रात में हुई थी - मुझे याद है ! मै भी एक इंसान हूँ ! फिर 'सेनारी' में हत्याएं हुई ! तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी ने जातिगत आधार पर् टिका टिपण्णी की थीं ! हत्याएं दूसरी तरफ से भी की गयीं वो भी घोर निंदनीय है ! पर् हम आप लालू दौर के सभी घटनाओं को जिम्मेदार दो , अन्ने मार्ग में रहने वाले उस राजगुरु को नहीं ठहरा सकते थे जो सुबह होते ही 'जातिगत' विशेष को गाली देते हुए अपने दिन की शुरुआत करता था - अगर यह सच है - फिर बिहार कोई कई और दसक लगेंगे ! दिल्ली / न्यूयार्क / लंदन में बैठ कर भी आप और हम एक दूसरे के लिये इतने नीचे स्तर पर् जा कर जातिगत आधार पर् गाली गलौज देंगे या उसको बढ़ावा देंगे - फिर शर्म आती है ! 
जहाँ तक वरिष्ठ पत्रकार और बाकी के लोग जातिगत आधार पर् टिका टिपण्णी दे रहे हैं - वो बहुत गलत है ! अगर आपके जातिगत टिका टिपण्णी को उचित मान लिया जाए तो भी - एक भाई के कमज़ोर होने से तत्कालीन तो आपका फायदा होगा - पर् अन्तोगत्वा आप ही कमज़ोर होंगे - इस् बात को याद रखियेगा ! 
"मै भूखा मर जाउंगा - पर् अपने बच्चों के खून में चीन के चंदे से और माओवाद / नक्सल के भीख से मिले पैसों का नमक नहीं मिलने दूँगा " !
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Rajeev Kumar Jha
आपने किसानों को बचाने के लिए "रणवीर सेना" संगठन बनाया जिसकी खूनी भिड़ंत अक्सर नक्सली संगठनों से हुआ करती थी. लेकिन सरकार ने आपको निजी सेना चलाने वाला उग्रवादी घोषित कर के प्रताड़ित किया. बाड़ा में नक्सली संगठनों ने हमारे 37 लोगों को मारा था जिसके जवाब में आपने बाथे नरसंहार को अंजाम दिया और उनके 58 पिल्लों को मार गिराया. 277 लोगों की हत्या से संबंधित 22 अलग अलग आपराधिक मामलों (नरसंहार) में आप अभियु...क्त बनाये गए जिसमें से 16 मामलों में आपको साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया. बाकी 6 मामलों में आप जमानत पर थे. आप पर पांच लाख का ईनाम था और आपने नौ साल जेल में गुज़ारे. आप नपुंसक नक्सलों के नाक में दम करने वाले जाबांज थे. आप जुबां से नहीं, बन्दूक से बोलते थे. बर्मेसर मुखिया, आप तोप थे, बिहार के लाल थे. आपकी आत्मा को शांति तब मिलेगी जब आपकी लडाई आपके जाने के बाद भी जारी रहेगी.
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Prakash K Ray
JD-U leader and MP Shivanand Tiwari calls Mukhiya with respectable 'Ji'. I am reminded of Digvijay Singh calling Osama bin Laden with 'Ji'.
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Shaishwa Kumar
एक भयानक सच्चाई का अंत...रणबीर सेना के ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या
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Awesh Tiwari
अंततः मार दिया गया मौत का मसीहा ब्रह्मेश्वर मुखिया ! यह वह व्यक्ति था ,जिसने 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारा। इसके इशारे पर बिहार में दलितों और पिछड़ों की बच्चियों के साथ बलात्कार किया गया। सैंकड़ों मासूमों का गर्दन एक झटके से उड़ा देने वाले रणवीर सेना का मास्टरमाइंड ब्रह्मेश्वर मुखिया खुलेआम कहता था कि दलितों और पिछड़ों के बच्चों को मारकर उसने और उसके साथियों ने कोई गलती नहीं की ,क्योंकि बड़े होने पर वे नक्सली ही बनते। 
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Ranjan Rituraj
Shaheed Ko Naman !!!
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Prakash K Ray via Ashutosh Kumar
नरपिशाच बरमेश्वर मुखिया की कहानी.....
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Sushil Jha
जातिगत लड़ाई का एक अध्याय खत्म माना जा सकता है क्या.....
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Kumar Alok
लालू यादव को पानी पीकर कोसने वाले ब्रहेश्वर मुखिया उनके राज में महफूज रहे...उनकी हत्या के बाद हालात को सामान्य बनाने की बडी जिम्मेदारी होगी नीतिश सरकार पर ।
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Prakash K Ray
संजीवना रे संजीवना, तू मुखियवा को काट के दामुल पर काहे नहीं चढ़ा रे संजीवना.. -'दामुल' (प्रकाश झा, 1985) का एक संवाद.
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Abhishek Srivastava
मुखिया तो गयो... आइए इस मौके पर अदम को एक बार फिर याद कर लें... 
...हैं कहाँ हिटलर, हलाकू, ज़ार या चंगेज़ ख़ाँ
मिट गये सब, क़ौम की औक़ात को मत छेड़िये...
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Prashant Priyadarshi
उसे ऐसे ही जाना था, वे ऐसे ही गए. कहते हैं तलवार कि धार पर जीने वाले तलवार की धार से ही मरा करते हैं.
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अविनाश दास-
ब्रह्मेश्‍वर मुखिया का मारा जाना हिंसा-अहिंसा की बहसों से ऊपर एक स्‍वाभाविक घटना है। यह न तो कोई चौंकाने वाली खबर है, न ही ब्रेकिंग न्‍यूज। हत्‍यारे मारे जाएंगे। बेबस के हाथों। वंचितों के हाथों।
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Dilip Khan लालू किस तरह ब्रह्मेश्वर की हत्या पर वह लाइन लेंगे जो आप सोच रहे हैं। उसके पास उस दिशा में जाने का कोई हक नही है। लालू बार-बार अपने बयान में ये कहते रहे कि किसानों-मज़दूरों को आपा नहीं खोना चाहिए। ऐसा लग रहा था गोया ब्रह्मेश्वर सिंह (मुखिया) ही किसान-मज़दूरों के प्रतिनिधि हो। लालू जैसे नेता के जमाने में ब्रह्मेश्वर ने सबसे ज़्यादा खून बहाया। लक्ष्मणपुर बाथे राबड़ी के शासन में हुआ (1 दिसंबर 1997) और बथानी टोला (11 जुलाई 1996) लालू के। क्या कर लिया था लालू ने? पूरे मसले पर लालू का बयान सिर्फ़ नीतीश को घेरने तक ही सीमित रहा।
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Sushil Kumar
सैकड़ों हत्याओं एवं नरसंहारों का आरोपी और प्रतिबंधित रणवीर सेना का मुखिया ब्रह्मेश्‍वर सिंह आखिरकार आज तडके मौत के घाट उतार दिया गया | उन चालीस गोलियों की गूंज में क्या कोई सन्देश छिपा है ? कहीं ये "लोक " का "तंत्र" से उठते विस्वास की गूंज तो नहीं ? 
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रजनीश के झा
उम्मीद जग रही है, बिहार शायद फिर जलेगा. जाति का घनघोर अँधेरा एक बार फिर बिहार में सर पसार रहा है. मुफ्तखोरों की तादाद बढ रही है और हम अपनी हिफाजत करेंगे. अपनी माटी की हिफाजत खून से करना होगा तो रंग लेंगे अपनी माँ को अपने रक्त से .
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Vijai Pratap 
बह्मेश्वर मुखिया को किसी ने नहीं मारा.....अपने हत्यारों का नाम बताने के लिए वह जिंदा नहीं रहा...कोर्ट ने बथानी टोला के फैसले में कहा था कि मौत की असली गवाह तो मरने वाला ही हो सकता है....
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Awesh Tiwari
जिन दिनों एम.एल के नेतृत्व में खेतिहर मजदूरी से सम्बद्ध जातियां राजनीतिक रूप से चेतस हो रही थीं, संगठित हो रही थीं, उन्हीं दिनों बिहार की राजनीति में मध्य जातियों ने सवर्ण वर्चस्व को समाप्त कर दिया था. यह जातीय तनाव का दौर था-सामजिक -आर्थिक और राजनीतिक वर्चस्व को बनाये रखने के लिए सवर्ण जमींदार आक्रोश मिश्रित छटपटाहट में थे . धीरे-धीरे मध्य जातियों ने पूरी तरह सत्ता स्थापित कर ली थी, सवर्ण जमींदार उनसे लम्बे दौर तक टकराने की स्थिति में नहीं थे, इसलिए सारा आक्रोश और अपने को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य हाशिये पर जीती जातियां बन गई,
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Manish Kumar Neurosurgeon
क्या रणवीर सेना को सभी अगडे / पिछड़े / दलित बड़े और मंझोले किसान का समर्थन नहीं हासिल था ? अगर आप घोर नक्सल हैं और आपके बच्चे के खून में नक्सल के चंदे का नमक मिला है फिर भी आपका दिल कहेगा - रणवीर सेना राष्ट्र विरोधी नहीं बल्की किसानों का संगठन था - 
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Ranjan Rituraj 
मैंने देखा नहीं है पर् मुझे बताया गया है की NDTV ने स्क्रोल किया - " Butcher of Bihar Killed " - 
आग उगलने के लिये आप स्वतंत्र हैं - आग में घी डालेंगे - बच के ..बाबा ..आग की लपट बड़ी तेज ...धोती गायब कर देगी ! 
क्या किसी कसाई की हत्या के बाद एक शहर नहीं पूरा क्षेत्र उबल सकता है ? अगर रणवीर सेना किसी एक खास जाति की संगठन... थी फिर उस जाति की संख्या कितनी है - बिहार में ? मात्र तीन प्रतिशत ! दस करोड़ के जनसँख्या में तीस लाख लोग - वो भी पुरे बिहार / भारत में फैले हुए - क्या कोई अल्पसंख्यक जाति किसी पुरे क्षेत्र को अपने कब्ज़े में ले सकती है ? मै किसी चम्पारण वाले से या मिथिला वाले से कुछ नहीं पूछना चाहता - पर् मै शाहाबाद के लोगों से पूछना चाहता हूँ - की क्या रणवीर सेना सिर्फ एक जाति की सेना थी ? क्या रणवीर सेना को सभी अगडे / पिछड़े / दलित बड़े और मंझोले किसान का समर्थन नहीं हासिल था ? अगर आप घोर नक्सल हैं और आपके बच्चे के खून में नक्सल के चंदे का नमक मिला है फिर भी आपका दिल कहेगा - रणवीर सेना राष्ट्र विरोधी नहीं बल्की किसानों का संगठन था - जिसके बैनर के तले भी हिंसा हुई है ..वैसे संगठन पर् प्रतिबन्ध लगाना शासन का काम है !
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Chandan Mishra
Those who are lauding the murder of chief of Ranvir Sena Brahmeshwar Mukhiya I have one thing to say them, ''even the murder of a murderer can not be justified.'' But, Ranvir Sena killed 50 people, during the 1995 state elections. They killed 10 workers in Haibaspur on the 23 March 1997. They wrote the name of the organisation in blood on the village well before they left. On 11 July 1996, 21 Dali...ts were slaughtered by the Ranvir Sena in Bathani Tola, Bhojpur in Bihar. Among the dead were 11 women, six children and three infants. On 1 December 1997, they killed 61 Dalits, which includes - 16 children, 27 women and 18 men with guns. The same night,disfigured and shot to death 5 teenage girls.[2] Ranvir Sena said about the killings: ''We kill children because they will grow up to become Naxalites. We kill women because they will give birth to Naxalites." On 25 January 1999, there was a massacre of 22 dalit men, women and children by Ranvir Sena in the village of Shankarbigha, Jehanabad due to their alleged Naxalite allegiance. There was another massacre two weeks later in the neighbouring village of Narayanpur, where Ranvir Sena killed twelve lower-caste people. And Now In April of 2012, members of the Ranvir Sena were acquited of Bathani Tola massacre in Bihar. Now I have question can all these be justified. My colleagues are saying the fight of Mukhiya and Ranvir sena was the fight of ''Astitava''. People are saying you can not understand the ground reality and the cause of the rise of Ranvir Sena. How Ranvir Sena came into existence it's all before everyone, but making him a ''martyr''. What a nonsense?
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Prakash Singh क्या जिन भूमिहार परिवारों की हत्याएं हुई। हत्या करने वाले उन नक्सलियों और आतंकियों को सजा मिली है। क्या मुखिया जी यूं ही शौक से हत्याएं करने लगे। क्या किसी की जमीन पर कब्जा करना जाएज है। अपनी जमीन को बचाने के लिए लड़ना नाजायज है।........
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vaibhav sinha-
रणवीर सेना के सरगना रहे ब्रह्मेशवर मुखिया की मौत शायद इसी तरह से ही हो सकती थी। हथियार बंद दस्ते के हाथों, क्योंकि वह खुद सबसे बड़ी सामंती अराजकता का प्रतीक था। जब अप्रैल 1997 में लक्ष्मणपुर-बाथे (जहानाबाद) जनसंहार हुआ था, तब कुछ दोस्तों के साथ मैं भी वहां फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य की तरह पहुंचा था। सोन नदी के रास्ते से आए हत्यारों ने गांव में कहर बरपाया था.. झोपड़ी की मिट्टी की दीवारों पर हर तर...फ गोलियों के निशान और जमीन पर खून के धब्बे। 58 लोगों की हत्या। उसी समय वहां अटल बिहारी वाजपेयी भी दौरे पर थे। लोग डरा रहे थे कि रणवीर सेना के लोग हमपर निगाह रख रहे हैं, वाजपेयी से सवाल किए तो वे पटना तक पहुंचने नहीं देंगे, रास्ते में ही मारे जाओगे। उस समय भाजपा का पूरा हाथ रणवीर सेना पर था, वाजपेयी हमेशा की तरह घड़ियाली आंसू बहाने पहुंचे थे। सेना के लोग भाजपा से लिए प्रचार करते रहे हैं। पर भाजपा वह दल है जो आज शायद सबसे पहले अपने इस गुर्गे की हत्या पर खुश हुआ होगा।
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3 comments:

  1. वीर ब्रह्मेश्वर मुखिया अमर रहें | वीर मुखिया को मेरा नमन | अपने देश और अपनी मातृभूमि के लिए लड़ना नाजायज कैसे हो सकता है ? दोनों के लिए लड़ना अपने हक की लड़ाई होगी |

    http://brahmeshwarmukhiya.blogspot.com

    http://www.facebook.com/pages/Bhumihar-Brahmarshi-Samaj/250531384972119

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  2. jaisa dusro k saath kiya wesa aaj khud ke sath hoga

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