Sunday, July 13, 2014

यूपीएससी: 'सवाल सिर्फ़ हिंदी का नहीं है'

यूपीएससी: 'सवाल सिर्फ़ हिंदी का नहीं है'

 रविवार, 13 जुलाई, 2014 को 14:32 IST तक के समाचार
यूपीएससी हिंदी छात्र
दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस से सटे मुखर्जी नगर में छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं. इसकी वजह है संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में सी-सैट की परीक्षा, जिसका हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं के छात्र विरोध कर रहे हैं.
2013 की परीक्षा में कामयाब हुए 1122 छात्रों में सिर्फ़ 26 हिंदी माध्यम के हैं.
(सी-सैट प्रणाली क्या है और क्या कहते हैं छात्र, पढ़ें अगली कड़ी में)
छात्र इसके लिए 2011 में लागू हुई सी-सैट परीक्षा प्रणाली को ज़िम्मेदार मानते हैं.

पढ़ें, दिलनवाज़ पाशा की रिपोर्ट विस्तार से

मुखर्जी नगर के बॉयज़ हॉस्टल के दस गुना आठ फ़ीट के कमरे में बैठे जॉली मित्तल किताबों और कपड़ों के बीच पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.
परीक्षा के नए स्वरूप ने जॉली जैसे छात्रों के लिए सफलता के रास्ते सीमित कर दिए हैं.
हिंदी भाषी छात्रों का विरोध प्रदर्शन
हिंदीभाषी छात्र मानते हैं कि सी-सैट परीक्षा अंग्रेजी माध्यम में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए ज़्यादा अनुकूल है.

'जटिल और भ्रामक अनुवाद'

2013 की सिविल सेवा परीक्षा में सफल हिंदी छात्रों का प्रतिशत मात्र 2.3 ही है. जबकि 2003 से 2010 के बीच ऐसे छात्रों का प्रतिशत हमेशा 10 से ज़्यादा रहा है. 2009 में यह प्रतिशत 25.4 तक था.
हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में परीक्षा देने वाले छात्र इसके लिए सी-सैट परीक्षा प्रणाली को ज़िम्मेदार मानते हैं.
यूपीएससी हिंदी विरोध प्रदर्शन
आंदोलन में शामिल छात्र चितरंजन कुमार कहते हैं, "अंग्रेज़ी में बनाए गए पेपर का अक्सर बेहद जटिल और भ्रामक हिंदी अनुवाद किया जाता है. मानक उत्तर पुस्तिका भी सिर्फ़ अंग्रेज़ी में ही बनती है."
अनशन पर बैठे नीलोत्पल निडाल कहते हैं, "मानविकी या कला वर्ग के छात्रों के लिए सी-सैट परीक्षा इसलिए मुश्किल है क्योंकि यह उनकी पृष्ठभूमि पर आधारित नहीं है. अंग्रेज़ी और गणित के छात्रों के लिए आसान है क्योंकि वे हमेशा से इसी में अभ्यास करते रहे हैं."

छात्रों की मुश्किल

हिंदी भाषी छात्रों का आंदोलन
सी-सैट से पहले मुख्य परीक्षा में बैठने वाले छात्रों में हिंदी और अन्य भाषाओं के छात्रों का प्रतिशत 40 से ज़्यादा होता था, जबकि सी-सैट के बाद इसमें भारी गिरावट आई.
2011 में मुख्य परीक्षा में बैठने वाले छात्रों में से 82.9% अंग्रेज़ी के थे. 2012 में यह संख्या 81.8% थी.
यूपी के एक गांव से तैयारी करने दिल्ली आए पंकज कुमार बताते हैं, "ग़रीब परिवार अपने बच्चों को अंग्रेज़ी स्कूल नहीं भेज पाते. न वे उन्हें इंजीनियरिंग या मेडिकल की महँगी शिक्षा दे पाते हैं. वे उन्हें सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रेरित करते हैं, पर सी-सैट ने इसे भी मुश्किल कर दिया है."
यूपीएससी की निगवेकर समिति ने 2012 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सी-सैट परीक्षा शहरी क्षेत्र के अंग्रेज़ी माध्यम के छात्रों को फ़ायदा पहुंचाती है.
सी-सैट हटाओ आंदोलन को अब सियासी समर्थन भी मिल रहा है. समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव ने इसे संसद में उठाया है.
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3 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  2. यह दुखद है कि भाषा के नाम पर बच्चों का रास्ता रोका जाए। यदि कुछ ऐसा है जो केवल अंग्रेज़ी में ही हो सकता है [यद्यपि ऐसा कुछ नहीं है] तो उसके लिए हिंदी माध्यम के बच्चों को पहले बताकर समुचित तैयारी करवाई जानी चाहिए, या कोई अलग समकक्ष फार्मूला निकाला जाना चाहिए।

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  3. आपसे सहानुभूति रखते हैं.
    यह हमारी भारतीयता की विडंबना है---अपनी भाषा को ही मान्यता नहीं दे पाए,दंभ भरते हैं अपने इतिहास पर----आज हमारा परतंत्र है.
    आपके जजबे को मेरा सलाम----जब आपने आवाज उठाई है तो सुनी भी जाएगी.

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