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Saturday, May 10, 2014

लड़का चाहे लंगोट बांध के घुमे, चाहे नंगा घुमे, चाहे सूट पहन के घुमे


Anuradha Beniwal
लड़का चाहे लंगोट बांध के घुमे, चाहे नंगा घुमे, चाहे सूट पहन के घुमे…. लड़कीयों को कभी कोई दिक्कत नहीं होती। ना वो एक नंगे लड़के पे टूट पड़ती हैं। ना कभी उन्हें "बेहया" का तगमा दिया जाता है। अगर कुछ लड़को कि सोच गिरी हुई है तो इसका भुगतान लड़कियां क्यूँ करे? लड़कीयों के पहनावे के ठेका समाज ने क्यूँ ले रखा है?? कहीं स्कर्ट बैन कर दी जाती हैं, कहीं दुप्पटा जरुरी कर दिया जाता है। कमाल है! शर्म भी नहीं आती इन ठेकेदारों को! थू! कुछ वर्ष पहले सभी पुरुष चोटी रखते थे, हिन्दू होने की पहचान होती थी चोटी। मुछो को भी मर्द होने का प्रतिक माना जाता था। आज ना कोई चोटी रखता है, ना कोई मूछों की परवाह करता है। कभी लड़कियां चिल्लाई के, "ये क्या पाप किये जाते हो", "प्रकर्ति के देन दाढ़ी मूछ मुंडवा के "बेहया" हुए जाते हो!" "चोटी काट के अधर्म किये जाते हो!" लेकिन आपकी मर्जी कि इज्ज़त कि जाती है। जो जी मैं आये करो! जब तक किसी दुसरे को नुकसान नहीं पहुंचाती तुम्हारी मर्ज़ी, एकदम जायज़ है। तो फिर नियम कानून सब लड़कियों के सर क्यूँ मढ़े जाएँ? अगर गली मैं पागल कुत्ते हों, तो बाहर निकलना बंद करते हो? गार्ड पहन के जाते हो? या पागल कुत्तो को गोली मरवा देते हो? अगर पागल कुत्ता काट भी ले, तो क्या दोष तुम्हे दिया जाता है, के बाहर क्यूँ निकले, या इस तरह के कपड़े क्यूँ पहने, तुमने कुत्ते को उकसाया तो नहीं? अरे कुत्ता पागल है, तो या तो कुत्ते का इलाज़ करवाओ, या उसे बंद करो, या गोली मारो दो। कुत्ते हमारी आज़ादी को तो नहीं खतरे मैं डाल सकते ना? लड़की की आज़ादी के नाम से ही क्यूँ सीने पे सांप लोटने लगते हैं? क्या डर लगता है? उसकी मर्ज़ी से तुम्हे क्या खतरा महसूस होता है? खुद पे नियंत्रण नहीं है तो ये तुम्हारी समस्या है, ना कि हमारी। और पागल कुत्ते तो २ साल कि बच्ची तक को नहीं बक्शते, क्या दुपट्टा और क्या साड़ी!

अपने कॉलेज और अपने गांव की लड़कियों से क्‍या कहते हैं


Anuradha Beniwal
मेरे पापा की बातें।
पापा हरयाणा मैं एक गर्ल्स कॉलेज के प्रिंसिपल हैं और हरियाणा के एक गांव में रहते हैं। वो अपनी दोनों बेटियों से, अपने कॉलेज और अपने गांव की लड़कियों से क्‍या कहते हैं -

1- अपने बापू से दहेज न मांग। उनसे आधा खेत मांग। आधा खेत भाई का तो आधा तेरा। अब कौन हल चलाना है। अब तो ट्रैक्‍टर से खेत जोतने हैं और लड़की भी ट्रैक्‍टर चला सकती है। अपना खेत खुद जोत और अपनी रोटी खुद कमा। अपना घर खुद बना।
2- भाई को राखी न बांध, न उससे पैसे ले। किसी से अपनी रक्षा करवाने की जरूरत नहीं। तू अपनी रक्षा खुद कर।
3- अपनी मर्जी से प्रेम कर, अपनी मर्जी से शादी कर। तेरा साथी कोई और नहीं ढूंढेगा। तू अपना साथी खुद ढूंढ।
4- तूने ससुराल नहीं जाना। न ही लड़के को घर जमाई बनाना है। दो लोग शादी करके अपना नया घर बनाओ।
5- प्रेम करने में कोई बुराई नहीं। प्रेम हो जाए तो किसी डर में न जीना। मेरी बच्‍ची, अगर प्रेम करने से लड़के का कुछ नहीं बिगड़ा तो तेरा भी कुछ नहीं बिगड़ा। किसी से प्रेम कर बैठे तो ये न सोचना कि अब उसी से शादी करनी पड़ेगी। वो अच्‍छा न लगे, तो उसे छोड़कर आगे बढ़ जाना।
6- घर से बाहर निकल, दुनिया देख। तू बाहर निकलकर मर भी जाएगी तो मुझे अफसोस नहीं होगा। लेकिन अगर तू दुनिया से डरकर इसलिए घर में बैठी रहेगी कि तू लड़की है, तो मुझे बहुत अफसोस होगा।
7- मेरे घर की इज्‍जत तेरे कंधों पर नहीं है। तू मेरी इज्‍जत नहीं, इसलिए इज्‍जत का ख्‍याल न करना। तू मेरा प्‍यार है, मेरा गुरूर है, अपना ख्‍याल करना।

वो न कॉमरेड हैं, न कोई राजनीतिक चिंतक, विचारक। कॉलेज में पढ़ाने और आज भी अपने खेत जोतने वाले एक साधारण इंसान। यह उनकी सहज बुद्धि से उपजी बातें हैं।
आप समझ रहे हैं न पढ़े-लिखे, शहरी, सो कॉल्‍ड मॉडर्न पापा लोगों, जो बेटे को प्रॉपर्टी देते हैं और बेटी को अपनी जाति में ढूढकर ससुराल।

भारत में अर्रेंज मैरिज अगर बैन हो जाए?


Anuradha Beniwal
थोड़ी देर के लिए फर्ज करो भारत में अर्रेंज मैरिज अगर बैन हो जाए? माता पिता, मौसी-बुआ, आंटी-अंकल, शादी कि जिम्मेदारी लड़के-लड़कियों पर ही छोड़ दे। बोलें के भई हमे तुम्हारी शादी से कुछ लेना देना नहीं तुम खुद अपने लिए जीवन साथी ढूंढो। क्या हो तब?

अब जीवन साथी खुद ढूंढ़ना है तो एक दूसरे को आपस में बातचीत करनी पड़ेगी, लड़को को लड़कियों और लड़कियों को लड़को को जानना पड़ेगा। आज कि तरह तो नहीं हो सकेगा के पूरी उम्र किसी लड़के से बात नहीं किये और जीवन-साथी मिल जाए। किसी लड़की के कभी दोस्त ना बने और बीवी मिल जाए। दोस्ती करनी पड़ेगी आपस में, एक दूसरे को समझना पड़ेगा। और एक नहीं कइयो को समझना पड़ेगा, विचार मिलाने होंगे, एक दूसरे को प्रभावित करना पड़ेगा। लड़को को लड़कियों से बात करनी, उनके साथ वयवहार करना सीखना होगा। लड़किओं को भी यही करना होगा। अब एक दूसरे से जब बात करने को मजबूर होंगे तो एक दूसरे को जानेंगे भी, और जब हम किसी चीज़ को जानते हैं तो हम उसकी इज्ज़त करते है। चाहे वो हमसे अलग हो लेकिन हम उससे डरते नहीं, दूर नहीं भागते और उसे नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन हमने जिस चीज़ को कभी जाना ही ना हो, कभी उससे सीधे सीधे बात ही ना कि हो, तो हम उत्सुक होते हैं, कभी डरते है, कभी उसके पास जाना चाहते है, कभी समझते है, कभी समझाना चाहते है। लेकिन हमारे पास माध्यम ही नहीं हैं।
हमारा समाज ये मौका हमे देता ही नहीं। लड़के-लड़कियो को आपस में दोस्ती करने के लिए, एक दूसरे को जानने के लिए प्रोहत्साहित करना तो दूर, हमारा समाज तो उनको जितना एक दूसरे से दूर रखने कि कोशिश में जुटा रहता है। ऐसे दूर रखा जाता है जैसे रेशम और आग। मजाल हमारे गाँव में लड़का लड़की दोस्त बन जाए, कभी हँसे, कभी बतियाएँ। ना-जी-ना! लड़के के किये माँ और बहन से अलग रिश्ता एकदम ह्झेउब्ब्स्य्च्नेउज्स्य जैसा है। लड़की के लिए बाप और भाई से अलग रिश्ता एकदम ज्स्ध्च्द्बुइएब्स्जस जैसा है। हाँ मुह-बोला भाई बनाना कभी कभी अलाउड होता है!! फिर एक दम से मिल जाते हैं पति और पत्नियां! एकदम से!

लड़का पूरी उम्र कभी लड़कयों कि इज्ज़त ना करे, छीटाकशी करे, अभद्र व्यवहार करे, ढंग से उसे लड़की से बात करना ना आये लेकिन उसको बीवी जरुर मिल जायेगी अपने रिश्तेदारो कि बदोलत। उसने कभी नहीं सीखा औरत कि इज्ज़त करना, उसे प्यार करना, उसे अपने व्यवहार से इम्प्रेस करना, क्यूंकि कभी जरुरत ही नहीं पड़ी। लेकिन सोचो ये अरेंज मैरिज का सिस्टम एकदम ख़तम हो जाए, मैरिज अरेंज करवाना अपराध हो जाए, तो क्या हो?

P.S btw मुझे पता है सब एक जैसे नहीं होता। भारत देश बहुत सुन्दर है। इसके मौसम का तो जवाब ही नहीं! मुझे राजस्तान बहुत पसंद है, और सिक्किम कि तो बात ही क्या है! इतनी सारी संस्कृतियां एक देश में सामना गजब है, इंडियन खाने को कोई तोड़ नहीं है! मुझे मेरे देश से बेहद प्रेम है।

Saturday, March 1, 2014

बैन करो इस अरेंज्ड मैरिज को तुरंत


थोड़ी देर के लिए फर्ज करो भारत में अर्रेंज मैरिज अगर बैन हो जाए? माता पिता, मौसी-बुआ, आंटी-अंकल, शादी कि जिम्मेदारी लड़के-लड़कियों पर ही छोड़ दे। बोलें के भई हमे तुम्हारी शादी से कुछ लेना देना नहीं तुम खुद अपने लिए जीवन साथी ढूंढो। क्या हो तब?

अब जीवन साथी खुद ढूंढ़ना है तो एक दूसरे को आपस में बातचीत करनी पड़ेगी, लड़को को लड़कियों और लड़कियों को लड़को को जानना पड़ेगा। आज कि तरह तो नहीं हो सकेगा के पूरी उम्र किसी लड़के से बात नहीं किये और जीवन-साथी मिल जाए। किसी लड़की के कभी दोस्त ना बने और बीवी मिल जाए। दोस्ती करनी पड़ेगी आपस में, एक दूसरे को समझना पड़ेगा। और एक नहीं कइयो को समझना पड़ेगा, विचार मिलाने होंगे, एक दूसरे को प्रभावित करना पड़ेगा। लड़को को लड़कियों से बात करनी, उनके साथ वयवहार करना सीखना होगा। लड़किओं को भी यही करना होगा। अब एक दूसरे से जब बात करने को मजबूर होंगे तो एक दूसरे को जानेंगे भी, और जब हम किसी चीज़ को जानते हैं तो हम उसकी इज्ज़त करते है। चाहे वो हमसे अलग हो लेकिन हम उससे डरते नहीं, दूर नहीं भागते और उसे नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन हमने जिस चीज़ को कभी जाना ही ना हो, कभी उससे सीधे सीधे बात ही ना कि हो, तो हम उत्सुक होते हैं, कभी डरते है, कभी उसके पास जाना चाहते है, कभी समझते है, कभी समझाना चाहते है। लेकिन हमारे पास माध्यम ही नहीं हैं।
हमारा समाज ये मौका हमे देता ही नहीं। लड़के-लड़कियो को आपस में दोस्ती करने के लिए, एक दूसरे को जानने के लिए प्रोहत्साहित करना तो दूर, हमारा समाज तो उनको जितना एक दूसरे से दूर रखने कि कोशिश में जुटा रहता है। ऐसे दूर रखा जाता है जैसे रेशम और आग। मजाल हमारे गाँव में लड़का लड़की दोस्त बन जाए, कभी हँसे, कभी बतियाएँ। ना-जी-ना! लड़के के किये माँ और बहन से अलग रिश्ता एकदम ह्झेउब्ब्स्य्च्नेउज्स्य जैसा है। लड़की के लिए बाप और भाई से अलग रिश्ता एकदम ज्स्ध्च्द्बुइएब्स्जस जैसा है। हाँ मुह-बोला भाई बनाना कभी कभी अलाउड होता है!! फिर एक दम से मिल जाते हैं पति और पत्नियां! एकदम से!

लड़का पूरी उम्र कभी लड़कयों कि इज्ज़त ना करे, छीटाकशी करे, अभद्र व्यवहार करे, ढंग से उसे लड़की से बात करना ना आये लेकिन उसको बीवी जरुर मिल जायेगी अपने रिश्तेदारो कि बदोलत। उसने कभी नहीं सीखा औरत कि इज्ज़त करना, उसे प्यार करना, उसे अपने व्यवहार से इम्प्रेस करना, क्यूंकि कभी जरुरत ही नहीं पड़ी। लेकिन सोचो ये अरेंज मैरिज का सिस्टम एकदम ख़तम हो जाए, मैरिज अरेंज करवाना अपराध हो जाए, तो क्या हो?

P.S btw मुझे पता है सब एक जैसे नहीं होता। भारत देश बहुत सुन्दर है। इसके मौसम का तो जवाब ही नहीं! मुझे राजस्तान बहुत पसंद है, और सिक्किम कि तो बात ही क्या है! इतनी सारी संस्कृतियां एक देश में सामना गजब है, इंडियन खाने को कोई तोड़ नहीं है! मुझे मेरे देश से बेहद प्रेम है।