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Monday, May 23, 2011

Eye on UP polls, Digvijay slams Osama's sea burial


May 3, 2011, 02.10am IST
NEW DELHI: With an eye firmly fixed on Uttar Pradesh's minority vote bank, Congress leader and state in-charge Digvijay Singh criticized the reported burial of Al Qaida leader and the world's most wanted terrorist Osama bin Laden at sea.
According to an agency report, Singh said, "However big a criminal one might be, his religious traditions should be respected while burying him."
Burial at sea was apparently due to fears that a grave might become a rallying point for his followers. Singh also said it is "surprising" that Laden with his family was staying just 100 metres away from a military academy and the Pakistan government had no idea about that. "Only America and Pakistan can say what had happened," he said.Singh's political positioning on terror issues has been consistent as he had questioned the Batla House shootout, involving the Indian Mujahideen, and had demanded a judicial inquiry. He had also met the relatives of those arrested or killed in the encounter in Azamgarh. With a fierce competition for minority vote ahead of UP assembly polls, the former Madhya Pradesh chief minister has sought to make sure that he is in sync with the reported popular sentiment.

Thursday, May 5, 2011

दिग्विजय का फिर विवादित बयान, अब बोले ‘ओसामाजी’

लखनऊ/नई दिल्ली/भोपाल. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पर दिए बयानों पर घिरते जा रहे हैं। बुधवार को उन्होंने ओसामा को ‘ओसामाजी’ कह कर ऐसे बयानों में एक और कड़ी जोड़ दी है। 

लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय ने ओसामा के सुरक्षित ठिकाने का सवाल उठाते हुए पाकिस्तान से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के आर्मी बेस के नजदीक रह रहे ओसामाजी के बारे में उसे भनक क्यों नहीं लगी। उन्होंने कहा कि हमने मुंबई हमले में मारे गए ‘लोगों’ को उनके धर्म के अनुसार दफन कर दिया था।

भाजपा ने कहा- शर्मनाक बयान : भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा एक तरफ तो दिग्विजय कांग्रेस अध्यक्ष को ‘सोनियाजी’ कहते हैं वहीं आतंकी लादेन को भी वे ‘ओसामाजी’ कह रहे हैं। वोट के लिए कांग्रेस नेता और कितना नीचे गिर सकते हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा ने कहा कि उनकी संस्कृति ऐसे ही लोगों को जी कहने की है। 

दिग्विजय के विवादित बयान

आरएसएस व विहिप के बारे में- हिंदू आतंकवाद के जनक, संगठित गिरोह की तरह कर रहे हैं काम, मुसलमान आरएसएस और बीजेपी से वैसे ही नफरत करते हैं जैसे नाजी यहूदियों से। 

26/11 के शहीद एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे के बारे में- करकरे ने कहा था कि उन्हें हिंदू कट्टरपंथियों से खतरा है।, बाटला हाउस मुठभेड़ : फर्जी थी यह मुठभेड़ ।

बुधवार को कहा

‘ओसामाजी पाक आर्मी बेस के 200 मीटर नजदीक रह रहे थे। फिर भी उन्हें इसकी कोई भनक क्यों नहीं लगी। पाकिस्तान को इसका जवाब देना होगा।’

मंगलवार को कहा था

‘अमेरिका ने ओसामा का शव समुद्र में फेंक दिया। कोई कितना भी बड़ा आतंकी क्यों न हो, उसकी अंतिम क्रिया उसके धर्म के मुताबिक करना चाहिए।’
http://www.bhaskar.com/article/mp-bpl-digvijay-singh-controversial-statement-creates-storm-in-political-circle-2078746.html

Tuesday, May 3, 2011

भारत के लिए असली खतरा कांग्रेस की मुसलमानों के बारे में तुस्तिकारी की निति और बीजेपी की हिन्दु आतंकवाद की निति से है


गुजरात और मालेगांव में बम विस्फोट 5 की मौत

भारत में महाराष्ट्र के मालेगांव और गुजरात के मोड़ासा शहर में सोमवार देर शाम बम दो बम विस्फोट हुए. इसमें कुल पांच लोगों के मारे गए हैं और 70 से ज़्यादा घायल हुए बताए जाते हैं. पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है सोमवार देर शाम महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए एक बम विस्फोट में चार लोग मारे गए और 70 घायल हुए हैं. यह विस्फोट एक मस्जिद के बाहर एक होटेल के नज़दीक भीखू चौक में हुआ.

पुलिस ने बताया कि सिल्वर रंग की मोटर साइककल पर यह बम रखा हुआ था. इस विस्फोट के बाद क्रुद्ध लोगों ने पथराव पुलिस पर पथराव किया जिसमें और लोग हताहत हुए. पांच पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. इस घटना के बाद मालेगांव में कर्फ्यू लगा दिया गया है.
सोमवार दिन में ही अहमदाबाद और दिल्ली में ज़िदा बम मिले थेसोमवार दिन में ही अहमदाबाद और दिल्ली में ज़िदा बम मिले थेएक और विस्फोट गुजरात में बांसकांठा ज़िले के मोडासा में हुआ.मालेगांव की तरह यह भी संवेदनशील इलाका है. यहां हुए बम विस्फोट में 15 साल का एक किशोर मारा गया और 10 घायल हुए हैं. गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह ने मीडिया को बताया कि यह बम एक मोटरसाइकल मे लगाया गया था.
ज़िले के एसपी आर बी ब्रम्हभट्ट ने बताया कि सुखा बाज़ार नाम के इस इलाके में हुए विस्फोट में एक किशोर की मौत हुई. इस समय लोग इफ़्तारी कर के निकल रहे थे. पुलिस ने बताया कि शुरूआती जांच से जान पड़ता है कि दो लोगों ने पार्क की हुई मोटरसाइकल पर यह बम रखा था. सोमवार को ही दिन में अहमदाबाद में कम तीव्रता वाले 17 ज़िंदा बम मिले थे जिन्हें पुलिस ने नाकाम किया.    

इस घटना के बाद भारत में सुरक्षा कड़ी की गई है. क्योंकि भारत में यह ईद और नवरात्री का समय है जहां बम विस्फोट हुए हैं वे दोनों ही ज़िले सांप्रदायिक संघर्षों का शिकार होते रहे हैं.  सोमवार को दिल्ली के फरीदाबाद इलाके में भई एख बम मिला था जिसे पुलिस ने निष्क्रिय किया.
26 जुलाई को ही गुजरात में सिलसिलेवार बम विस्फोंटों में 45 लोग मारे गए थे. उधर 2006 में मालेगांव में बम विस्फोट हुए थे जिसमें 23 लोग मारे गए थे. पिछले छह महीने में राजस्थान, गुजरात, दिल्ली महाराष्ट्र में बम विस्फोटों की बडी़ घटनाएँ हुई हैं.

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मुंबई।। स्वामी असीमानंद के कबूलनामे को देखते हुए स्पेशल कोर्ट ने मालेगांव ब्लास्ट के मामले में सीबीआई को फिर से जांच की अनुमति दे दी है। असीमानंद के बयान के बाद सीबीआई ने मकोका कोर्ट में इसके लिए अर्जी दी थी।

असीमानंद ने अपने कबूलनामें में एक मैजिस्ट्रेट के सामने कहा था कि एक हिंदू गुट ने वर्ष 2006 में मालेगांव विस्फोट को अंजाम दिया था। इस विस्फोट में 37 लोगों की मौत हो गई थी और 100 लोग घायल हो गए थे।

सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करते हुए जज यतिन डी. शिंदे ने एजेंसी को क्रिमिनल प्रसीजर कोड की धारा 173 )के तहत इस ब्लास्ट की फिर से जांच करने का आदेश दिया। सीबीआई के वकील एजाज खान ने कहा, असीमानंद के बयान में न तथ्यों का खुलासा किए जाने के बाद हमें इस मामले में आगे की जांच करना है। 

असीमानंद उर्फ जतिन चटर्जी ने अपने बयान में कहा था कि आरएसएस के कार्यकर्ता सुनील जोशी और अन्य मालेगांव विस्फोट के लिए जिम्मेदार थे। इन दोनों की हत्या कर दी गई थी।

सन् 2006 में हुए ब्लास्ट में महाराष्ट्र एटीएस ने चार्जशीट भी दायर की थी। हालांकि बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। एटीएस की चार्जशीट में कहा गया था कि दो पाकिस्तानियों ने तस्करी कर लाए गए आरडीएक्स से बम तैयार किए थे। इनमें से एक का नाम मुज़म्मिल था। पुलिस का कहना था कि स्मगलिंग करके 20 किलो आरडीएक्स लाया गया था और 5 किलो से 6 बम तैयार किए गए थे।


मालेगांव में सन् 2008 में भी ब्लास्ट हुआ था। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को गिरफ्तार किया गया था। http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/7277961.cms


दिग्विजय सिंह ने ओसमा को समुद्र में दफनाने की निंदा की

नई दिल्ली , मई 3, 2011 12:52
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ओसमा बिन लादेन के शव को समुद्र में दफनाए जाने को गलत बताते हुए इसकी निंदा की है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा अपराधी क्यों न हो, अंतिम क्रियाकर्म के दौरान उसके धार्मिक रिवाजों का सम्मान किया जाना चाहिए.


दिग्विजय सिंह ने मीडिया में जारी एक बयान में यह भी कहा है कि ओसामा मिलिट्री एकेडमी से महज 100 मीटर की दूरी पर अपने परिवार के साथ रह रहा था. लेकिन पाकिस्तान सरकार का यह कहना कि उसे इस बारे में खबर नहीं थी, काफी आश्चर्यजनक है. उन्होंने कहा कि सच क्या है यह तो सिर्फ अमरीका और पाकिस्तान ही बता सकते हैं.


गौरतलब है कि ओसामा बिन लादेन के शव को अमेरिका ने समुद्र में दफना दिया है. अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इस्लामिक रीति-रिवाजों के मुताबिक ही शव को समुद्र में दफनाया गया है. अमेरिका का कहना है कि ओसामा को समुद्र में इसलिए दफनाया गया, क्योंकि कोई भी देश उसे दफनाने के लिए दो गज जमीन नहीं देता. हालांकि, माना जा रहा है कि ओसामा को समुद्र में इसलिए दफनाया गया, कयोंकि अगर उसको जमीन में दफनाया जाता तो, उसके समर्थक उस जगह पर कोई धर्म स्थल बना सकते थे.


कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह आजकल मीडिया में सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी ज्यादा छाये हुए हैं। कहने की आवश्यकता नहीं कि क्यों? उनके पास एक ही एजेन्डा है और वह यह कि किसी भी तरीके से हिन्दू आतंकवाद की नई अवधारणा को स्थापित करें। इसके लिये वे उस हर राजनीतिक सीमा को लांघने के लिये तैयार हैं। जहां पर यह माना जाता है कि कोई नेता खुद को लाइमलाइट में लाने के लिये कोई भी हथकण्डा अपनाने के लिये तैयार है। दिग्विजय सिंह कोई छुटभैया नेता नहीं है। लाइमलाइट में रहने की उनको कोई आवश्यकता भी नहीं है। वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस में उनकी ऊँची पैठ है। उ0प्र0 जैसे महत्वपूर्ण राज्य में कांग्रेस को स्थापित करने का उन्हें जिम्मा दिया गया है और सबसे बड़ी बात यह कि उन्हें राहुल गांधी का राजनीतिक सलाहकार माना जाता है। फिर यह सोचना कि दिग्विजय सिंह हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा को स्थापित करने का अभियान व्यक्तिगत तौर पर चला रहे हैं, नासमझी की बात होगी। तो क्या यह माना जाये कि कांग्रेस भी दिग्विजय सिंह के अभियान में पूरी तरह साथ है। क्या कांग्रेस भी यह मान चुकी है कि उसके खुद के जनाधार के लिये और सैक्युलर छवि बनाये रखने के लिये हिन्दुओं के सम्मानित नेताओं को आतंकवादी बताना अपरिहार्य है। कांग्रेस इतना बड़ा जोखिम नहीं ले सकती। मुस्लिम वोट के लिये हिंदुओं के वोट को तिलांजलि देने की हिम्मत कांग्रेस नहीं कर सकती। फिर दिग्विजय सिंह का अनर्गल बयान कांग्रेस अध्यक्ष क्यों बर्दाश्त कर रही है।
कई ऐसे मौके आये जब मीडिया ने यह जानना चाहा कि देश के लिये बलिदान देने वाले महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी हेमन्त करकरे के बारे में दिग्विजय सिंह ने जो कुछ भी कहा उसका कांग्रेस पार्टी से कोई लेना-देना है कि नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष ने चुप्पी साधकर भ्रम की स्थिति बनायी रखी। जब कांग्रेस के दिल्ली अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने भी हिन्दू आतंकवाद से देश पर खतरा के रागअलापे तो शायद किसी को यह भ्रम अब नहीं रहा कि दिग्विजय सिंह जो कुछ भी कह और कर रहे हैं, कांग्रेस उससे अलग विचार नहीं रखती। कांग्रेस के अंदर भी यह रणनीति बन रही है कि हर मोर्चे पर विफल होने और नेताओं के भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद जनता का ध्यान हटाने के लिये उसके पास क्या बेहतर विकल्प हैं? मंहगाई, भ्रष्टाचार और राजनैतिक अनैतिकता को ढंकने के लिये कांग्रेस को कुछ ऐसी सनसनी चाहिए जिसे मीडिया में आसानी से भुनाया जा सके और जिसकी आड़ लेकर प्रमुख विपक्षी पार्टी को खामोश रखने का प्रयत्न किया जा सके। इस काम के लिये कांग्रेस के पास दिग्विजय सिंह जैसे नेता से अच्छा विकल्प और क्या हो सकता था? अच्छी हिन्दी और अंग्रेजी बोलने वाले वाकपटु और लोगों से घुलमिल जाने वाले दिग्विजय सिंह कांग्रेस के इस प्रपोगण्डा को आसानी से बढ़ा सकते थे। इसलिये यह काम उन्हीं को सौंपा गया। बाटला हाउस काण्ड को दिग्विजय सिंह ने पहला हथियार बनाया और यह कहकर सनसनी फैला दी कि पुलिस एनकाउंटर में मारे गये लोग आतंकवादी नहीं शरीफ थे और उन्हें एनकाउंटर में नहीं बल्कि सोच समझकर मारा गया। कहने की आवश्यकता नहीं कि बाटला हाउस में एनकाउंटर किसी और राज्य की पुलिस ने नहीं बल्कि कांग्रेस शासित दिल्ली के पुलिस ने जिसमें एक अधिकारी की मौत भी हो गयी थी, किया था।
दिग्विजय सिंह ने बाटला हाउस काण्ड पर सवाल खड़े कर उ.प्र. के मुसलमानों की हमदर्दी खरीदने की कोशिश की। वह इसे और पुख्ता करने के लिये आजमगढ़ गये जहां से पिछले कुछ सालों में कई ऐसे नाम निकले जिन पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। दिग्विजय सिंह ने आजमगढ़ जाकर एकतरफा ऐलान भी कर दिया कि बाटला हाउस की वह फिर से जांच करायेंगे। हालांकि प्रधानमंत्री ने उससे इंकार किया लेकिन दिग्विजय सिंह की यह चाल रंग लायी, उ.प्र. में कांग्रेस को मुसलमानों का समर्थन मिला और अच्छी संख्या में लोकसभा की सीटें जीतने में कामयाब रही। संभवतः आतंकवादी घटनाओं के लिये पूरे विश्वभर में इस्लाम से जुड़े लोगों के नाम आने के बाद एक तरह से धारणा बनने लगी कि विश्व में इस्लामिक आतंकवाद का बोलबाला हो गया है। भारत में भी घटी तमाम आतंकवादी घटनाओं के पीछे लगे जितने भी चेहरे सामने आये उनमें अधिकतर मुसलमान ही थे। धीरे-धीरे भारतीय जनमानस भी पश्चिम द्वारा इस्लामी आतंकवाद की अवधारणा को मानने लगा। हालांकि राजनैतिक रूप से इस अवधारणा का विरोध किया गया लेकिन कांग्रेस ने इसे राजनैतिक रूप में भुनाने का फैसला किया। कांग्रेस यह खतरा नहीं उठा सकती थी कि इस्लामी आतंकवाद के सामने हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा नेतृत्व के स्तर से उठाती। इसलिये कुछ ऐसे लोग खड़े किये गये जिनके सहारे इस नये राजनैतिक हथकण्डे को आजमाया जा सके। दिग्विजय सिंह का पहला प्रयोग सफल था। इसलिये यह जिम्मेदारी उन्हीं को दी गयी।
जब-जब विपक्ष ने मनमोहन सिंह की सरकार पर हल्ला बोला, तब-तब दिग्विजय सिंह ने उसको कमजोर करने के लिये हिन्दू आतंकवाद का मुद्दा उठाया। जब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर विपक्ष ने संसद ठप किया, बोफोर्स दलाली को लेकर प्रधानमंत्री को कठघरे में खड़ा किया तब दिग्विजय सिंह ने भी हिन्दू आतंकवाद का मुद्दा अलग-अलग ढंग से उठाया, कभी उन्होंने करकरे से हुये अपनी फोन वार्ता को हथियार बनाया तो कभी यह बयान देकर मीडिया में बड़ी जगह पायी कि देश में हुए सभी विस्फोटों के लिये हिन्दू आतंकवादी जिम्मेदार हैं। उन्होंने मालेगांव का जिक्र किया, उन्होंने समझौता एक्सपे्रस का जिक्र किया, उन्होंने हेमन्त करकरे का जिक्र किया और सबको शिवसेना एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ दिया। मीडिया के लिये यह सनसनी थी। मीडिया ने उनके बयानों को परखे बिना उसकी टाइमिंग की परीक्षा किये बिना, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उसकी प्रासंगिकता को जांचे बिना दिग्विजय सिंह को खूब महत्व दिया। कांग्रेस और मनमोहन सिंह की सरकार को भ्रष्टाचार और मंहगाई के लिये कटघरे में खड़ा करने के साथ-साथ संघ और भाजपा को भी अनर्गल मामलों में भी जवाब देने के लिये उत्तरदायी बनाया। कहने की आवश्यकता नहीं कि दिग्विजय सिंह अपनी योजना में अब तक सफल रहे हैं। उनके सहारे कांग्रेस भी विपक्ष के हमले की धार को कमजोर करने में सफल रही है। मकसद देश को गुमराह कर अपनी खाल बचाये रखना था, जिसमें फिलहाल कांग्रेस सफल रही और दिग्विजय सिंह का होना सार्थक रहा।